
गरियाबंद। प्रधानमंत्री जन मन योजना के अंतर्गत संचालित होने वाले मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है।
हैदराबाद की निजी कंपनी के हाथों संचालन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना का संचालन हैदराबाद स्थित एक निजी कंपनी के हाथों में है। भर्ती प्रक्रिया भी इसी कंपनी के द्वारा कराई जा रही है।
भर्ती के नाम पर वसूली
अभ्यर्थियों का आरोप है कि पैरामेडिकल स्टाफ, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और ड्राइवर पदों पर नियुक्ति के लिए उनसे ₹50,000 तक की डिमांड की जा रही है। यह रकम किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि निजी तौर पर वसूली की जा रही है।
व्हाट्सएप कॉल पर सौदेबाजी
नाम न बताने की शर्त पर एक अभ्यर्थी ने खुलासा किया कि उसे व्हाट्सएप कॉल पर नौकरी दिलाने के लिए ₹50,000 की मांग की गई। रकम देने पर नौकरी पक्की करने का भरोसा दिलाया गया।
गरीब युवाओं से छलावा
नौकरी की आस लगाए बैठे गरीब और बेरोजगार युवाओं से इस तरह की अवैध वसूली उनके सपनों के साथ खिलवाड़ है। योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना है, लेकिन भर्ती में भ्रष्टाचार के कारण न तो योग्य अभ्यर्थी चुने जा रहे हैं और न ही सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित हो पा रही है।
सेवाओं की गुणवत्ता पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि पैसे लेकर भर्ती करने से योग्य उम्मीदवार बाहर रह जाएंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसका सीधा नुकसान ग्रामीण जनता को होगा।
स्थानीय लोगों की नाराज़गी और जांच की मांग
इस पूरे मामले ने स्थानीय लोगों और अभ्यर्थियों में नाराज़गी फैला दी है। लोगों का कहना है कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना को लूट का जरिया बना दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की माँग की है।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
अब तक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं?


