अमाडं ग्राम पंचायत में पुल–पुलिया नहीं बनने से ग्रामीण परेशान, बरसात में बढ़ती मुसीबत

चन्द्रहास निषाद (पत्रकार)गरियाबंद। अमाडं ग्राम पंचायत के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या अब भी जस की तस है। बरसात के दिनों में पुल–पुलिया नहीं होने से गांव के लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अति विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्र घोषित होने के बावजूद आज तक शासन–प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

कई वर्षों से लंबित मांग
ग्रामीणों ने बताया कि वे विगत कई वर्षों से शासन–प्रशासन से पुल–पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। सड़क से लेकर सदन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
ग्राम पंचायत अमाडं के निवासी इस मुद्दे पर एकजुट होकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसमें प्रमुख रूप से रतिराम ओटी, गोपालसिंह नेमाम, पुस्तमसिंह मांझी, बलिराम सोरी, तुलाराम सोरी, बालाराम सोरी, देवनाथ सोरी, धनसिंग सोरी, गणेश यादव, मदंन यादव, धनेश्वर नागवंशी, टिकचंद ओटी, हेमंत नागवंशी, कार्तिक नायक, दुलारसिंह नागवंशी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं।
महिलाओं ने भी उठाई आवाज
गांव की महिलाओं ने भी पुल–पुलिया की मांग को लेकर प्रशासन से गुहार लगाई है। इसमें बिंददाबाई नेताम, सुभद्राबाई नेमाम (सरपंच), रेवती नेताम, खिरमनीबाई नागवंशी, रामबाई नागवंशी, सुकवातिबाई नागवंशी और पुष्पा ठाकुर ने भागीदारी निभाई।
ग्रामीणों का कहना
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी–नालों का जलस्तर बढ़ जाने से बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और जरूरतमंदों को आवाजाही करने में भारी दिक्कत होती है। कई बार मरीज समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाती है।
अब तक अनदेखी
ग्रामीणों ने नाराजगी जताई कि कई बार लिखित आवेदन और जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।


