विकास कार्यों की उपेक्षा से आक्रोशित जनता ने किया चक्का जाम का ऐलान, प्रशासन की समझाइश पर 15 दिन की मोहलत

गरियाबंद। 29 अगस्त 2025 को
क्षेत्र में वर्षों से लंबित विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। शासन-प्रशासन द्वारा बार-बार अनुरोध के बावजूद समाधान न मिलने से जनता ने चक्का जाम आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि, जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद आंदोलन को फिलहाल 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है।

जनता की प्रमुख मांगें:
1. सती नाला में निर्माण कार्य – लंबे समय से अधूरा पड़ा है। बरसात में बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों का आवागमन बाधित होता है।
2. चंदन बहारा हाफ डेम – सिंचाई की गंभीर समस्या को देखते हुए किसानों की यह प्राथमिक मांग है। डेम निर्माण से जलसंकट और खेती दोनों में राहत मिलेगी।
3. कोसमी से बिंद्रानवागढ़ तक सड़क – सड़क की हालत जर्जर है, बरसात में पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है।
4. रावणडिग्गी से गोबरा तक सड़क – संपर्क मार्ग न होने से ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
5. कोसमी डेम की मरम्मत – बार-बार निवेदन के बावजूद मरम्मत न होने से किसानों की जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का ऐलान:
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि 15 दिनों में मांगों पर ठोस कार्यवाही शुरू नहीं होती, तो वे पुनः चक्का जाम आंदोलन करेंगे। आंदोलन का नेतृत्व राकेश मुर्री, जनपद सदस्य गरियाबंद द्वारा किया जा रहा है।
प्रशासन की पहल:
प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है। इसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल चक्का जाम को 15 दिनों के लिए स्थगित करने पर सहमति जताई है। साथ ही, सड़कों और पुल-पुलियों के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का भरोसा भी अधिकारियों ने दिया।


