
चन्द्रहास निषाद, गरियाबंद ।शिवनी धान मंडी में वन पट्टाधारी किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं होने के कारण धान बेचने से वंचित होना पड़ रहा है। शासन द्वारा धान खरीदी के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य किए जाने के बाद वन अधिकार पट्टा (फॉरेस्ट पट्टा) धारक किसानों की जमीन का रिकॉर्ड सिस्टम में अपडेट नहीं हो पाया है, जिससे उनकी उपज की खरीदी नहीं की जा रही। प्रभावित किसानों का कहना है कि वर्षों से वे शासन द्वारा प्रदत्त वन पट्टे की भूमि पर खेती कर रहे हैं और धान उपार्जन केंद्रों में नियमित रूप से धान बेचते आए हैं। लेकिन इस वर्ष एग्रीस्टेक में भूमि विवरण नहीं दिखने के कारण उनका पंजीयन निरस्त बताया जा रहा है। इससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है ।
किसानों ने बताया कि मंडी में धान लेकर पहुंचने के बावजूद उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जा रहा है कि एग्रीस्टेक में जमीन दर्ज नहीं है। इससे न केवल समय और मेहनत बर्बाद हो रही है, बल्कि धान खराब होने की भी आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि वन पट्टाधारी किसानों के लिए विशेष व्यवस्था करते हुए एग्रीस्टेक में शीघ्र सुधार किया जाए, ताकि वे धान बिक्री से वंचित न रहें। साथ ही, अस्थायी समाधान के तौर पर मैनुअल सत्यापन के आधार पर धान खरीदी की अनुमति देने की भी मांग की गई है।
यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसानों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।


