
न्यूज बॉक्स 24,गरियाबंद। कुंभ मेले के नाम से प्रख्यात छत्तीसगढ़ का कमल क्षेत्र पद्मावतीपुरी प्रयाग राज कहे जाने वाले राजिम देश और दुनिया में अन्तर्राष्ट्रीय पहचान बना चुकी है। जहां धर्म आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम के अलावा छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीन-तीन नदियों का संगम महानदी, पैरी, सोडहू तीन जिला गरियाबंद, रायपुर, धमतरी तीन वि.खं. फिगेश्वर, मगरलोड, अभनपुर तीन थाना राजिम, नवापारा, मगरलोड का नजारा और अनेकों प्रसिद्ध इतिहासिक मंदिरों का बेजोड़ निर्माण होने से धर्म नगरी के नाम से सुविख्यात है। वहीं राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से लगातार राजिम महोत्सव , राजिम कुंभ राजिम माघी पुन्नी मेला, और कल्प कुंभ के नाम से प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता रहा है। इस दौरान देश भर के संतो का आगमन शाही स्नान,संत समागम, सत्संग प्रवचन आदि गतिविधियों के साथ साथ राज्य और देश के प्रसिद्ध कलाकारों को मंच देकर प्रसिद्धि और उपलब्धि भी हासिल की जाती है।
किन्तु यहां के स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों को अनदेखा कर नियमित रूप से मंच नहीं किया जाना विडम्बना है। इस बारे मे कलाकार जिला संगठन प्रमुख राजकुमार यादव और गौकरण मानिकपुरी ने बताया कि बीच में नाचा गम्मत और अन्य विधाओं के स्थानीय कलाकारों को मंच देना बंद कर दिया गया था,जिस सम्बन्ध में मांग और आंदोलन करने के पश्चात तत्काल अतिरिक्त मंच बनाकर क्षेत्रीय कलाकारों को मंच दिया गया किन्तु मानदेय राशि कम कर दिया गया,जो उचित नहीं है।
और छोटे बड़े कलाकार में व्यवहार या व्यवस्था में भेदभाव स्थिति भी इस आयोजन में देखी जाती है , चाहे वह बैठक उठने ठहराव या भोजन व्यवस्था क्यों न हो। प्रतिवर्ष होने वाले आयोजन में उपरोक्त सभी रुपरेखाओं में यथासंभव सुधार हो, इसलिए कलाकारों ने जिम्मेदार शासन प्रशासन से आग्रह किया है कि , कुछ विषयों पर विचार करते हुए , मुख्य मंच पर प्रतिदिन चार कार्यक्रम की प्रस्तुति हो, जिसमें दो स्थानीय और दो राज्य या राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को आमंत्रित किया जाय। साथ ही साथ मानदेय राशि में कलाकारों की संख्या और परिवहन खर्च देखते हुए बढ़ोतरी किया जाय।यदि प्रतिवर्ष की भांति अतिरिक्त मंच सजता है । वहां भी योग्यता के आधार पर या जिसे पूर्व वर्ष दिया गया हो ,उसे इस वर्ष विराम देकर अन्य कलाकारों को मंचीय अवसर देंवे। साथ ही साथ हर साल होने वाले गठित टास्क फोर्स समिति में तीनों जिला गरियाबंद धमतरी और रायपुर के कलाकारों के प्रमुखों को इस समिति में शामिल किया जाए। जिस तरह हर वर्गों से इसमें शामिल किए जाने की परम्परा है। जिसमें मंत्री सांसद विधायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि साधु संत पत्रकार मिडिया कर्मियो को सम्मिलित किया जाता है।
शासन प्रशासन को पूर्व से अवगत कराने का आशय है कि ,देश प्रदेश , जिला हमारा है, मंत्री सांसद विधायक सरकार हमारी है धर्म नगरी राजिम हमारी है जिला हमारा है और मंच भी हमारे है। सब बातों विशेषताओं विविधताओं के गरिमा आन बान और शान को देखते हुए कलाकारों साहित्यकारों का भी पहचान और मान बढे।
प्रशासन से आग्रह करने वाले कलाकारों में प्रमुख राजकुमार यादव लोहरसिंग , गौकरण मानिकपुरी फुलझर घटारानी नूतन लाल साहू संतोष व्यास संतोष कुमार सोनकर तुलेश्वर घृतलहरे गंगा बाई मानिकपुरी बाबूलाल साहू चैतू राम तारक बुधारु यादव दौलत यादव गिरवर सिंह ध्रुव खेम बाई निषाद शंभू राम टोण्डरे उमेश कुमार पटेल तुला राम साहू महेश साहू इकबाल खान ठाकुर राम साहू महेश निर्मलकर रुक्मणी दीवान महेश्वरी सिन्हा हीरा बाई चक्रधारी आदि है।
गौकरण


