राजिम-सहसपुर। आज ग्राम पंचायत सहसपुर में हलषष्ठी का पर्व बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें पंडित तेजप्रकाश तिवारी जी द्वारा व्रत रखी महिलाओं को हलषष्ठी की सम्पूर्ण कथा सुनाया यह पर्व विशेष रूप से पुत्रवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, जो अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस अवसर पर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पारंपरिक गीत-संगीत के साथ त्योहार का आनंद लिया।

गांव के विभिन्न मंदिरों और घरों में सुबह से ही हलषष्ठी की पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने समूह में एकत्रित होकर पूजा-पाठ किया। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर हलषष्ठी देवी की आराधना की। पूजा में विशेष रूप से पसई चावल (धान का चावल), भैंस का दूध और महुआ के पत्तों का प्रयोग किया गया। मान्यता है कि यह व्रत रखने से संतान को बल, बुद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
पूजा के बाद महिलाओं ने एक साथ मिलकर पारंपरिक लोकगीत गाए इस दौरान माहौल पूरी तरह से भक्ति और उल्लास से सराबोर रहा। महिलाओं द्वारा बड़े धूमधाम से भगवान शिव और नाव को बाजे गाजे के साथ सगरी बने स्थान पर ले जाया गया जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि यह पर्व हमारे लिए बहुत खास है। हम हर साल अपने बच्चों के दीर्घायु कल्याणकरी के लिए यह व्रत रखते हैं और मिलकर गीत गाकर इस त्योहार को मनाते हैं। इस प्रकार, हलषष्ठी का पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और लोक संस्कृति का भी प्रतीक बन गया है। शाम होते-होते सभी ने मिलकर पूजा का समापन किया और व्रत खोला।



