
चन्द्रहास निषाद/NB24/गरियाबंद। फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार प्रकरण) गरियाबंद ने नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर (21 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 23 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने बताया कि पीड़िता ने थाना इंदागांव में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि 19 मई 2025 की शाम वह अकेले नाले की ओर गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसके गर्दन पर चाकू टिकाकर मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी देते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने परिजनों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद थाना इंदागांव में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। विवेचना उपरांत उप पुलिस अधीक्षक गरिमा दादर, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विकास पाटले एवं उप निरीक्षक जितेन्द्र कुमार विजयवार द्वारा न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने अपराध को सिद्ध करने के लिए कुल 14 साक्षियों के बयान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने पीड़िता के बयान, चिकित्सा रिपोर्ट, अन्य साक्ष्यों एवं अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषसिद्ध पाया। न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(1) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये के अर्थदंड, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपये के अर्थदंड तथा धारा 115(2) के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 3 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों के मामलों में न्यायिक व्यवस्था की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।


