गरियाबंद। सुप्रीम कोर्ट और शासन-प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद गरियाबंद जिले में तंबाकू युक्त गुटखा एवं पान मसाला का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गुटखा खुलेआम बिक रहा है और इसकी लत अब बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं तक में फैल चुकी है।
जिले में बड़े पैमाने पर गुटखे की थोक व खुदरा बिक्री हो रही है। पान की दुकानों और किराना दुकानों पर गुटखे की लड़ियां खुलेआम सजाकर बेची जा रही हैं। गांव-गांव तक फैला यह जाल इतना मजबूत है कि प्रतिबंध के बावजूद कारोबारियों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
🚫 सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जून 2019 से गुटखा और पान मसाले के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। बावजूद इसके जिले में यह कारोबार धड़ल्ले से जारी है। मुनाफाखोरी के लालच में कारोबारी लोगों को कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार बना रहे हैं।
⚠️ प्रशासन की नाकामी
जिले में प्रतिबंधित गुटखे की खुलेआम बिक्री प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है। स्थानीय लोग मानते हैं कि संबंधित विभाग की चुप्पी और कार्रवाई न होने के कारण कारोबारियों के हौसले और भी बुलंद हैं। चर्चा है कि कार्रवाई की बजाय मामले को दबा दिया जाता है।
🩺 स्वास्थ्य पर पड़ रहा दुष्प्रभाव
गुटखे का सेवन अब फैशन बन चुका है। युवाओं से लेकर महिलाएं तक इसकी लत में फंसते जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तंबाकू युक्त गुटखा कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन जल्द से जल्द इस पर कड़ी कार्यवाही करते हुए अवैध कारोबार पर रोक लगाए, ताकि लोगों को मौत के सौदागरों से बचाया जा सके।



