
चन्द्रहास निषाद, गरियाबंद।छत्तीसगढ़ – शासन की नक्सल आत्मसमर्पण-पुनर्वास योजना की सफलता का एक और उदाहरण सामने आया है। अपने साथियों के खुशहाल जीवन से प्रभावित होकर, एक शीर्ष महिला माओवादी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। जानसी उर्फ वछेला मटामी, जो नगरी एरिया कमेटी की सचिव थी और जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था, ने बेहतर भविष्य के लिए हिंसा का रास्ता छोड़ दिया।

जानसी उर्फ वछेला मटामी, मूल रूप से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की निवासी है। उसने साल 2005 में माओवादी संगठन में शामिल होकर जनमिलिशिया सदस्य के रूप में काम करना शुरू किया। इसके बाद वह चातगांव एलओएस, माड क्षेत्र और गरियाबंद डिवीजन जैसे विभिन्न माओवादी यूनिटों में अलग-अलग पदों पर रही। उसने प्रेस, बैनर, पोस्टर, और पाम्पलेट बनाने का प्रशिक्षण भी लिया। 2011 में उसने डीव्हीसीएम सत्यम गावडे से शादी की और जुलाई 2022 से वह नगरी एरिया कमेटी की सचिव के रूप में काम कर रही थी।
आत्मसमर्पण के बाद जानसी ने माओवादियों की विचारधारा को खोखला और दूषित बताया। उसने कहा कि माओवादी संगठन आज निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, बेवजह परेशान करना, सरकारी विकास कार्यों को नुकसान पहुंचाना, और युवाओं को बहला-फुसलाकर संगठन में भर्ती करने जैसे गलत काम कर रहे हैं। उसने ठेकेदारों और स्थानीय लोगों से अवैध वसूली को भी संगठन का प्रमुख हिस्सा बताया। इन सब स्थितियों को देखकर और अपने लोगों पर हो रहे अत्याचार को देखकर उसका मन विचलित हो गया था।
जानसी ने बताया कि उसके कई साथी, जिनमें आयतु, संजय, मल्लेश, मुरली, टिकेश, प्रमीला, लक्ष्मी, और अन्य शामिल हैं, ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था और वे शासन की योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। समाचार पत्रों और स्थानीय लोगों से उन्हें पता चला कि आत्मसमर्पण करने वालों को पद के अनुसार इनाम राशि, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवास, और रोजगार जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। पुलिस द्वारा जंगलों और गांवों में लगाए गए पोस्टर-पाम्पलेट ने भी उसके मन में विचार पैदा किया कि वह क्यों पशुओं की तरह भटक रही है और बड़े माओवादी कैडरों की गुलामी कर रही है।
अपने पति सत्यम गावडे के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई थी। जंगल की परेशानियों और आत्मसमर्पित साथियों के खुशहाल जीवन से प्रेरित होकर, उसने अपने परिवार के साथ एक अच्छा जीवन बिताने के लिए आत्मसमर्पण का मार्ग चुना। इस कदम में सुकमा पुलिस का विशेष योगदान रहा।
इस आत्मसमर्पण से यह साबित होता है कि सरकार की पुनर्वास नीतियां सफल हो रही हैं और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा रखने वाले लोगों को एक नई दिशा मिल रही है।


