
गरियाबंद(न्यूज बॉक्स 24)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड की गुत्थी सुलझे एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पूरी तरह नहीं सुलझ पाई है। अब इस मामले में नया मोड़ आने की संभावना तब प्रबल हो गई, जब 25 सितंबर की रात उनके गृह ग्राम हीराबतर में स्थापित प्रतिमा (स्टेच्यू) को अज्ञात व्यक्ति द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

परिवार ने जताया गहरा संदेह
प्रतिमा तोड़े जाने की घटना ने पत्रकार परिवार को एक बार फिर से झकझोर कर रख दिया है। उमेश राजपूत के परिजनों ने संदेह जताया है कि प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति का संबंध कहीं न कहीं उस हत्याकांड से जुड़े लोगों से हो सकता है। उनका कहना है कि यह सिर्फ तोड़फोड़ की घटना नहीं है, बल्कि इसमें बड़े षड्यंत्र की गंध है।
हत्या के दिन भी गए थे गृह ग्राम
याद दिला दें कि 23 जनवरी 2011 को उमेश राजपूत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से कुछ ही घंटे पहले वे अपने गृह ग्राम हीराबतर ही गए थे और लौटने के तुरंत बाद इस घटना को अंजाम दिया गया था। यह संयोग भी परिवार और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीबीआई जांच और बयान
इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच सीबीआई के हाथों में है। जांच के दौरान सीबीआई ने उमेश राजपूत के गृह ग्राम के कई लोगों के बयान भी दर्ज किए थे। इस वजह से प्रतिमा तोड़े जाने की घटना पर फिर से शक की सुई उन्हीं संदिग्ध कड़ियों की ओर घूम रही है।
धमकी का इतिहास
परिजनों ने बताया कि उमेश राजपूत की हत्या के बाद उनके भाई को भी धमकी दी गई थी। अज्ञात व्यक्तियों ने उनके घर पर पर्चा फेंक कर गोली मार देने की चेतावनी दी थी। इस धमकी के कारण परिवार पहले से ही दहशत में था।
पुलिस और सीबीआई की भूमिका
स्थानीय पुलिस ने इस घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं परिवार का मानना है कि यह मामला सिर्फ सामान्य शरारत नहीं है, बल्कि इसके तार उमेश राजपूत हत्याकांड से जुड़े लोगों तक जा सकते हैं। ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में सीबीआई भी इस मामले को लेकर फिर से पूछताछ कर सकती है।
अदालत में जारी है सुनवाई
वर्तमान में उमेश राजपूत हत्याकांड की सुनवाई रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही है। प्रतिमा तोड़े जाने की यह नई घटना अदालत और जांच एजेंसियों के लिए भी गंभीर संकेत मानी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ ग्रामीणों बल्कि प्रदेशभर के पत्रकार जगत और बौद्धिक वर्ग में भी हलचल मचा दी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर एक दशक बाद भी पत्रकार की प्रतिमा तक को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।


