
न्यूज़ बॉक्स 24,गरियाबंद । गरियाबंद भाजपा मंडल उपाध्यक्ष गोविंद तिवारी ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन में अब भारत आत्मनिर्भर बनने जा रहा है हमने संकल्प लिया है कि अब देश को आत्मनिर्भर बनाने में हम सब संकल्पित होकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी को एकजुट होना होगा ।
उन्होंने बताया कि जीएसटी (GST) के “नेक्स्ट जनरेशन” या “अगली पीढ़ी” के सुधारों का प्रभाव भविष्य की पीढ़ी (next generation) पर काफी सकारात्मक होने की उम्मीद है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आम नागरिक पर टैक्स का बोझ कम करना है, जिसका सीधा फायदा आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।
मुख्य प्रभाव जो अगली पीढ़ी पर पड़ेंगे कम टैक्स स्लैब और सस्ती वस्तुएं
टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया है जैसे 12% और 28% स्लैब को हटाकर मुख्य रूप से 5% और 18% स्लैब पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इससे रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं दैनिक उपभोग की वस्तुएं इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां, स्वास्थ्य सेवाएँ, और वाहन जैसी कई चीजें सस्ती हुई हैं।
परिणाम अगली पीढ़ी के लिए जीवन यापन की लागत कम होगी और क्रय शक्ति बढ़ेगी।
टैक्स अनुपालन का बोझ कम होने और कम टैक्स दरों से लघु, छोटे और मध्यम उद्यमों को फायदा होगा।
अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ने और व्यापार में आसानी होने से जीडीपी वृद्धि को गति मिलेगी।
परिणामस्वरूप एक मजबूत अर्थव्यवस्था से बेहतर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और देश की आर्थिक वृद्धि की गति बनी रहेगी, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।
आयकर में राहत और वस्तुओं/सेवाओं के सस्ते होने से नागरिकों की बचत बढ़ेगी।
यह बढ़ी हुई बचत भविष्य में उच्च निवेश और आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।
जीएसटी एक तकनीक-आधारित प्रणाली है, जो भ्रष्टाचार को कम करने और पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक है।जिससे अगली पीढ़ी को एक अधिक पारदर्शी और कुशल कर व्यवस्था मिलेगी,जो सुशासन को बढ़ावा देगी।
कृषि उपकरण, जैव कीटनाशक, और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी छूट पर जीएसटी दरों में कमी की गई है। यह किसानों और आम जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे अगली पीढ़ी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और कृषि क्षेत्र में प्रगति मिलेगी।
जीएसटी के नेक्स्ट जनरेशन सुधारों का लक्ष्य एक सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित टैक्स प्रणाली बनाना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए कम महंगाई, अधिक रोज़गार और एक मजबूत,आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का आधार बनेगी।
स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और खरीदी से देश बनेगा आत्मनिर्भर भारत
देश आत्मनिर्भर कब बनेगा जब हम अपनी देश बनी हुई वस्तुओं का इस्तेमाल उपयोग करेंगे , स्वदेशी अपने देश में बनी वस्तुओं के उपयोग के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं, जो देश की आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय उन्नति में सहायक होते हैं।
स्वदेशी वस्तु उपयोग के मुख्य फायदे आर्थिक मजबूती और विकास की ओर होगी जब आप स्वदेशी उत्पाद खरीदते हैं, तो आपका पैसा देश के भीतर ही रहता है। यह पैसा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, न कि विदेशी अर्थव्यवस्था को।
रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ने से देश के भीतर उत्पादन बढ़ेगा । इससे नए उद्योगों की स्थापना होगी और लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
सरकारी बजट को स्थिरता बने रहेगी स्वदेशी उत्पादों से प्राप्त राजस्व सरकार को मिलेगा जिससे देश के विकास कार्यों और बजट को स्थिर करने में मदद करता है।
स्वदेशी उपयोग से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग देश को आवश्यक वस्तुओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है, जिससे देश आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनता है।
स्थानीय कारीगरों और उद्योगों को प्रोत्साहन
छोटे उद्योगों को समर्थन मिलता है स्वदेशी को अपनाने से लघु और मध्यम उद्योगों तथा स्थानीय कारीगरों को सीधा समर्थन मिलता है। इससे उनकी कला, कौशल और आजीविका बनी रहती है।
स्वदेशी उत्पाद अक्सर स्थानीय रूप से प्राप्त सामग्री का उपयोग करते हैं, और उन्हें लंबी दूरी तक आयात करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे परिवहन लागत और कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहतर है।
देश में निर्मित उत्पादों पर बेहतर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण संभव हो पाता है, क्योंकि वे स्थानीय नियमों और मानकों के तहत बनाए जाते हैं।
स्वदेशी अपनाने से राष्ट्रीय भावना और संस्कृति देशभक्ति की भावना पैदा होती है स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना एक तरह से देश के प्रति समर्पण और देशभक्ति की भावना को दर्शाता है।
स्वदेशी उत्पाद अक्सर देश की संस्कृति और विरासत को दर्शाते हैं। इनके उपयोग से राष्ट्रीय पहचान और गौरव को बढ़ावा मिलता है।
स्वदेशी का उपयोग करके आप न केवल एक ग्राहक बनते हैं, बल्कि देश के विकास और समृद्धि में एक सक्रिय भागीदार भी बनते हैं।
इस तरह स्वदेशी अपनाने से भारत आत्मनिर्भर बन पाएगा यही हमारा संकल्प है ।


